Home मुंबई *राज्यपालांच्या हस्ते लडाख येथील युवा बौद्ध धर्मगुरू पल्गा रिम्पोछे राष्ट्रीय एकात्मिक समरसता...

*राज्यपालांच्या हस्ते लडाख येथील युवा बौद्ध धर्मगुरू पल्गा रिम्पोछे राष्ट्रीय एकात्मिक समरसता पुरस्काराने सन्मानित*

16
0

*राज्यपालांच्या हस्ते लडाख येथील युवा बौद्ध धर्मगुरू पल्गा रिम्पोछे राष्ट्रीय एकात्मिक समरसता पुरस्काराने सन्मानित*

*.. तर सर्वांना सोबत घेऊन वाटचाल करावी लागेल : राज्यपाल*

जगातील अनेक देश आज संघर्ष व हिंसाचाराला तोंड देत आहेत. भारतीय संस्कृती मात्र संपूर्ण मानवतेला सहअस्तित्व व समरसतेचा मार्ग दाखवते. भारतात विभिन्न धर्मियांच्या प्रार्थना पद्धती वेगवेगळ्या असतील परंतु सर्व जण मानवतेच्या सामायिक धाग्याने एक आहेत. हाच एकात्म मानववाद आहे. देशाला स्वर्ग बनवायचे असेल तर सर्वांना सोबत घेऊन वाटचाल करावी लागेल, असे प्रतिपादन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा यांनी येथे केले.

लडाख येथील महायान बुद्ध परंपरेतील ८ वे अवतारी लामा पल्गा रिम्पोछे तसेच ज्येष्ठ विचारवंत इंद्रेश कुमार यांना बुधवारी (दि. ५ ऑगस्ट) राज्यपालांच्या हस्ते शांतता व राष्ट्रीय एकात्मतेसाठी केलेल्या कार्याबद्दल ‘राष्ट्रीय एकात्मिक समरसता’ पुरस्काराने सन्मानित करण्यात आले, त्यावेळी राज्यपाल बोलत होते. विधानसभेचे उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे यांच्या पुढाकाराने सचिवालय जिमखाना येथे या सन्मान सोहळ्याचे आयोजन करण्यात आले होते.

आपल्या इतिहासात भारताने कधीही इतरांवर राज्य करण्याची इच्छा बाळगली नाही. प्रभू रामाने लंका जिंकल्यावर देखील तेथे न थांबता आपल्या मातृभूमीकडे प्रस्थान करण्याचा निर्णय घेतला, असे राज्यपालांनी सांगितले.

लडाख येथे आयोजित सिंधू महाकुंभ आयोजनाच्या माध्यमातून राष्ट्रीय एकात्मता, सामाजिक समरसता व सर्व पंथ समभावाचा संदेश दिल्याबद्दल राज्यपालांनी पल्गा रिम्पोछे यांचे आभार मानले. लामा पल्गा रिम्पोछे हे युवा प्रेरक वक्ते असून त्यांच्या आधुनिक जीवन पद्धतीमुळे ते नव्या पिढीचे नायक आहेत. देशातील युवकांना आज रिम्पोछे यांच्या सारख्या नेतृत्वाची आवश्यकता असल्याचे राज्यपालांनी सांगितले. भगवान बुद्धांच्या तत्वज्ञानाचा भारतीयांवर मोठा प्रभाव असून भारतीय राज्यघटनेमध्ये भगवान बुद्धांच्या आदर्शांचे प्रतिबिंब आढळते असे राज्यपालांनी सांगितले. यावेळी राज्यपालांनी इंद्रेश कुमार यांचा विभिन्न धर्मीयांमध्ये मैत्रीभावना, सद्भावना व बंधुभाव दृढ केल्याबद्द्दल गौरव केला.

इंद्रेश कुमार यांनी सर्व धर्मांचा आदर करण्याचे तसेच धर्मांतर न करण्याचे आवाहन केले. देशात प्रत्येकाची मानवता ही पहिली तर राष्ट्रीयत्व ही दुसरी ओळख असली पाहिजे असे त्यांनी सांगितले. जगाने युद्ध दिले तर भारताने बुद्ध दिले असे सांगून देशप्रेम हा प्रत्येक भारतीयाचा धर्म असला पाहिजे असे पल्गा रिम्पोछे यांनी सांगितले. विविधता हे आपल्या देशाचे बलस्थान असल्याचे त्यांनी नमूद केले. विधान सभेचे उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे यांनी सत्कार सोहळ्यामागची भूमिका स्पष्ट केली.

कार्यक्रमाला विविध धर्मांचे प्रतिनिधी आणि बौद्ध भिक्षु संघाचे भिक्षु तसेच न‍िमंत्र‍ित उपस्थित होते. यावेळी राज्यपालांच्या हस्ते डॉ राहुल बोधी महाथेरो, भदंत बुद्धश्री महाथेरो, भन्ते आनंद, भन्ते साधनानंद व भन्ते प्रज्ञानंद यांना प्रातिनिधिक रूपात चीवरदान करण्यात आले.
**

*राज्यपाल के हाथों लद्दाख के युवा बौद्ध धर्मगुरु पल्गा रिनपोछे राष्ट्रीय एकात्मता एवं सामाजिक समरसता पुरस्कार से सम्मानित*
*”देश को स्वर्ग बनाना है तो सबको साथ लेकर चलना होगा” : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा*
विश्व के अनेक देश आज संघर्ष और हिंसा की विभीषिका का सामना कर रहे हैं, जबकि भारतीय संस्कृति संपूर्ण मानवता को सह-अस्तित्व, शांति और सामाजिक समरसता का मार्ग दिखाती है। भारत में विभिन्न धर्मों की उपासना-पद्धतियाँ भिन्न हो सकती हैं, किंतु सभी मानवता के साझा सूत्र से जुड़े हुए हैं। यही एकात्म मानववाद का मूल संदेश है। यदि हमें देश को स्वर्ग बनाना है, तो समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। यह विचार महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने व्यक्त किए।

राज्यपाल बुधवार (5 अगस्त) को लद्दाख की महायान बौद्ध परंपरा के आठवें अवतारी लामा पल्गा रिनपोछे तथा वरिष्ठ चिंतक इन्द्रेश कुमार को शांति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘राष्ट्रीय एकात्मता एवं सामाजिक समरसता पुरस्कार’ से सम्मानित करने के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। यह सम्मान समारोह महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे की पहल पर मुंबई के सचिवालय जिमखाना में आयोजित किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि भारत के इतिहास में कभी भी दूसरे देशों पर शासन करने की महत्वाकांक्षा नहीं रही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद भी वहाँ राज्य करने के बजाय अपनी मातृभूमि लौटना ही उचित समझा। यही भारत की संस्कृति और जीवन-दृष्टि का परिचायक है।

राज्यपाल ने लद्दाख में आयोजित ऐतिहासिक सिंधु महाकुंभ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सर्वपंथ समभाव का सशक्त संदेश देने के लिए पल्गा रिनपोछे का विशेष अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि पल्गा रिनपोछे एक प्रेरणादायी युवा आध्यात्मिक नेता हैं, जिनकी आधुनिक और सकारात्मक जीवन-दृष्टि उन्हें नई पीढ़ी का आदर्श बनाती है। आज देश के युवाओं को उनके जैसे दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने कहा कि भगवान बुद्ध के विचारों का भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है तथा भारतीय संविधान में भी भगवान बुद्ध के आदर्शों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।

उन्होंने इन्द्रेश कुमार की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच मैत्री, सद्भाव और बंधुत्व को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

अपने संबोधन में इन्द्रेश कुमार ने सभी धर्मों के सम्मान का आह्वान करते हुए धर्मांतरण से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय की पहली पहचान उसकी मानवता और दूसरी पहचान उसका राष्ट्रीयत्व होना चाहिए।

पल्गा रिनपोछे ने कहा कि संसार ने यदि युद्ध का मार्ग देखा है, तो भारत ने भगवान बुद्ध के माध्यम से विश्व को शांति और करुणा का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति प्रत्येक भारतीय का सर्वोच्च धर्म होना चाहिए तथा भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।

इस अवसर पर महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे ने समारोह के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

समारोह में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, बौद्ध भिक्षु संघ के सदस्य तथा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस अवसर पर राज्यपाल ने डॉ. राहुल बोधी महाथेरो, भदंत बुद्धश्री महाथेरो, भन्ते आनंद, भन्ते साधनानंद तथा भन्ते प्रज्ञानंद को प्रतीकात्मक रूप से चीवरदान (बौद्ध भिक्षुओं को परंपरागत भिक्षु-वस्त्र अर्पित करने की पवित्र परंपरा) भी किया।

**

*Governor Confers National Integration and Social Harmony Award on Ladakh’s Palga Rinpoche and Indresh Kumar*

Maharashtra Governor Jishnu Dev Varma presented the National Integration and Social Harmony Award to Palga Rinpoche, the 8th reincarnate Lama of the Mahayana Buddhist tradition from Ladakh, and senior thinker Indresh Kumar in recognition of their contribution to promoting peace, national integration and social harmony at a function in Mumbai.

The programme was organised at the initiative of Deputy Speaker of the Maharashtra Legislative Assembly, Shri Anna Bansode.

Representatives of various faiths, members of the Buddhist Sangha and invited dignitaries were present on the occasion.

The Governor presented Kathina robes (Chivar Daan) to Buddhist monks on the occasion

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here